Saturday, December 3, 2011
ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी श्री रामेश्वराश्रम जी महाराज
ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी श्री रामेश्वराश्रम जी महाराज दिनांक 26 फरवरी, 2000 को संक्षिप्त बीमारी के बाद 89 वर्ष की अवस्था में महानिर्वाण को प्राप्त हो गये।
28 जनवरी, 1911 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में रेडी गांव में आपका जन्म हुआ था। बचपन से सतत् आत्मानुंसधान में आप लगे रहे। सन् 1952 में आपने राजस्थान के सुदूर बकानी ग्राम में ‘गुरुकुल’ की स्थापना की थी। लगभग 25 वर्ष तक संन्यास लेने के बाद भी आप स्वतः शिक्षा कार्य में लगे रहे। सन् 1972 में संस्था को सरकार को सौंप दिया, आज जहां माध्यमिक विद्यालय कार्यरत है।
निरंतर चिंतनरत स्वामी जी ‘सहज साधना’ का अमृत संदेश साधारण जन तक पहुंचाते रहे। न तो विधिवत कोई आश्रम वहां था न ही कहीं विशिष्ट परंपरा के निर्वाह की प्रक्रिया थी, एक साधारण सी कुटिया, और झोले के साथ स्वामीजी अंचल के सामान्य अकिंचन घर तक आध्यात्मिक का संदेश देते रहे। न अमीर न गरीब किसी प्रकार का कोई भेद वहां नहीं था। सभी के लिए कुटिया का द्वार सदा खुला रहता था। अपनी अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति सम्पदा के बावजूद स्वामी सरल व सहज ही रहें।
आपके निरन्तर सान्निध्य में कुछ प्रसन्न उभरते रहे,यह पहली पुस्तक पहली बार सन ्1975 में प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक तब सभी का आकर्षण का केन्द्र बन गई थी। कई वर्षों से अप्राप्त भी थी।
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